सिंगल-फेज एक्स-रे जनरेटर (Single-Phase X-Ray Generator)

सिंगल-फेज एक्स-रे जनरेटर (Single-Phase X-Ray Generator): यह एक विद्युत शक्ति प्रणाली (Power System) है जो एकल ज्यावक्रीय प्रत्यावर्ती धारा (Single AC Sinusoidal Waveform – आमतौर पर 220 से 240 V, 50 या 60 Hz) पर कार्य करती है। यह एक्स-रे ट्यूब के आर-पार उच्च वोल्टेज विभव (High-Voltage Potential) उत्पन्न करने के लिए उपयोग किया जाने वाला प्रारंभिक तकनीकी ढांचा है, जो प्राइमरी वोल्टेज नियंत्रण, फिलामेंट हीटिंग और हाई-टेंशन ट्रांसफॉर्मेशन के बुनियादी सिद्धांतों को स्थापित करता है।

1. परिपथ की संपूर्ण संरचना एवं उप-परिपथ (Subsystems Breakdown)

एक सिंगल-फेज एक्स-रे जनरेटर मुख्य रूप से तीन आपस में जुड़े हुए और अत्यधिक सटीक उप-परिपथों (Sub-circuits) के माध्यम से कार्य करता है:

220V/240V AC Mains (50/60 Hz) 1. Primary (kVp) Control Circuit • Line Voltage Compensator • Autotransformer & Pre-Reading Meter • Exposure Timer & Contactors 2. Filament Heating Circuit • mA Selector (Precision Resistors) • Focal Spot Selector (Small/Large) • Step-Down Isolation Xfmr (6-12V, 3-6A)
Figure 1: Major Functional Sub-Circuits of a Single-Phase Diagnostic Generator
  • लो-वोल्टेज प्राइमरी (कंट्रोल) परिपथ: इसमें लाइन वोल्टेज कम्पेन्सेटर, ऑटोट्रांसफार्मर (kVp सिलेक्टर), प्री-रीडिंग वोल्टमीटर और प्राइमरी टाइमर कॉन्टैक्टर्स शामिल होते हैं। यह ऑपरेटर को सुरक्षित रखने के लिए कम वोल्टेज (100 से 440 V) पर काम करता है।
  • फिलामेंट परिपथ: यह mA सिलेक्टर की मदद से फिलामेंट ट्रांसफार्मर के करंट को नियंत्रित करता है। एक स्टेप-डाउन ट्रांसफार्मर (Np : Ns ≈ 10:1 से 20:1) वोल्टेज को घटाकर 6 से 12 V करता है और हीटिंग करंट को 3 से 6 A तक बढ़ाकर थर्मियोनिक उत्सर्जन करवाता है।
  • हाई-वोल्टेज (सेकेंडरी) परिपथ: यह स्टेप-अप ट्रांसफार्मर (Ns : Np ≈ 500:1 से 1000:1) का उपयोग करके प्राइमरी वोल्टेज को किलोवोल्ट (40 से 150 kVp) में बदलता है। इसकी सेकेंडरी वाइंडिंग को बीच से ग्राउंड (Center-Tapped Ground) किया जाता है ताकि केबलों पर इंसुलेशन का तनाव आधा हो जाए। इसके बाद रेक्टिफायर बैंक एक्स-रे ट्यूब को एकदिशीय धारा भेजता है।

2. सिंगल-फेज रेक्टिफिकेशन के प्रकार (Classifications)

क. सेल्फ-रेक्टिफाइड जनरेटर (Self-Rectified / Half-Wave, 0 Diodes)

  • संरचना: इसमें कोई बाहरी रेक्टिफायर डायोड नहीं होता; एक्स-रे ट्यूब स्वयं एक वैक्यूम डायोड की तरह कार्य करती है।
  • कार्यप्रणाली: चालन केवल धनात्मक अर्ध-चक्र (Positive Half-Cycle) में होता है जब कैथोड ऋणात्मक और एनोड धनात्मक होता है। ऋणात्मक अर्ध-चक्र में धारा का प्रवाह पूरी तरह रुक जाता है।
  • आउटपुट पल्स: 50 पल्स/सेकंड (50 Hz पर) या 60 पल्स/सेकंड (60 Hz पर)।
  • थर्मल जोखिम (Thermal Danger): यदि एनोड का तापमान अत्यधिक बढ़ जाए (> 2,000°C), तो ऋणात्मक चक्र के दौरान एनोड से इलेक्ट्रॉन निकलकर कैथोड फिलामेंट पर टकराने लगेंगे, जिससे फिलामेंट तुरंत पिघलकर नष्ट हो जाएगा। इसलिए इसका उपयोग केवल कम क्षमता वाले डेंटल और पोर्टेबल यूनिट्स तक सीमित है।

ख. हाफ-वेव रेक्टिफाइड जनरेटर (Half-Wave Rectified, 1 या 2 Diodes)

  • संरचना: इसमें सेकेंडरी वाइंडिंग के साथ श्रेणी क्रम (Series) में 1 या 2 हाई-वोल्टेज सॉलिड-स्टेट सिलिकॉन डायोड जुड़े होते हैं।
  • कार्यप्रणाली: यह ऋणात्मक वोल्टेज चक्र (Inverse Voltage) को पूरी तरह रोक देता है, जिससे एनोड टारगेट सुरक्षित रहता है।
  • आउटपुट पल्स: 50 या 60 पल्स/सेकंड।
  • सीमा: इसमें विद्युत धारा केवल आधे समय के लिए बहती है; 50% समय पूरी तरह निष्क्रिय (Dead Time) रहता है, जिसके कारण फुल-वेव की तुलना में दोगुना एक्सपोज़र समय लगता है।

ग. फुल-वेव रेक्टिफाइड जनरेटर (Full-Wave Bridge, 4 Diodes)

  • संरचना: इसमें चार सॉलिड-स्टेट डायोड्स को एक बंद ब्रिज (Bridge) के रूप में जोड़ा जाता है।
  • कार्यप्रणाली: यह ऋणात्मक अर्ध-चक्र को भी धनात्मक दिशा में मोड़ देता है, जिससे AC तरंग के दोनों चक्रों में धारा हमेशा कैथोड से एनोड की ओर ही बहती है।
    • धनात्मक अर्ध-चक्र: धारा D1 → Tube → D4 के रास्ते बहती है।
    • ऋणात्मक अर्ध-चक्र: धारा D3 → Tube → D2 के रास्ते बहती है।
  • आउटपुट पल्स: 100 पल्स/सेकंड (50 Hz पर) या 120 पल्स/सेकंड (60 Hz पर)।
  • लाभ: हाफ-वेव की तुलना में प्रति सेकंड दोगुना विकिरण उत्पादन होता है, जिससे आवश्यक एक्सपोज़र समय आधा हो जाता है और मोशन आर्टिफ़ैक्ट्स (Motion Blur) कम होते हैं।
High-kV Secondary A B D1 D2 D3 D4 X-Ray Tube Cathode (-) e⁻ Stream Anode (+) Pulsed X-Ray Beam
Figure 2: 4-Diode Bridge Rectification in a Single-Phase High-Voltage Stage

3. वेवफॉर्म एवं वोल्टेज रिपल विश्लेषण (Voltage Ripple Analysis)

वोल्टेज रिपल प्रतिशत (Voltage Ripple Formula):
Voltage Ripple (%) ={( Vmax − Vmin )Vmax } × 100

1. Single-Phase Half-Wave (100% Ripple) 50% Dead Time (Zero Output) 2. Single-Phase Full-Wave (100% Ripple) Continuous Pulses (Drops to Zero Twice/Cycle) RMS Effective Potential: Vrms = 0.707 × Vmax Average photon energy is only ~33% to 40% of the peak kVp setting.
Figure 3: Output Voltage Waveform Profiles of Single-Phase X-Ray Generators
  • वोल्टेज रिपल (Voltage Ripple): हाफ-वेव और फुल-वेव दोनों प्रणालियों में वोल्टेज रिपल 100% होता है, क्योंकि ट्यूब का वोल्टेज हर चक्र में शून्य तक गिरता है।
  • औसत फोटॉन ऊर्जा (Mean Photon Energy): वोल्टेज लगातार बदलते रहने के कारण सिंगल-फेज एक्स-रे बीम की औसत प्रभावी ऊर्जा पीक kVp की केवल ≈ 33% से 40% ही होती है।
  • न्यूनतम एक्सपोज़र समय (Exposure Time Limit): यह AC सप्लाई की आवृत्ति (Frequency) पर निर्भर करता है:
    • 60 Hz पर: 1/120 s ≈ 8.3 ms (फुल-वेव) या 1/60 s ≈ 16.7 ms (हाफ-वेव)।
    • 50 Hz पर: 1/100 s = 10 ms (फुल-वेव) या 1/50 s = 20 ms (हाफ-वेव)।

4. तापीय भार एवं हीट यूनिट (HU) की गणना

एक्स-रे ट्यूब के एनोड पर उत्पन्न होने वाली ऊष्मा को हीट यूनिट्स (HU) में मापा जाता है। सिंगल-फेज वोल्टेज के बार-बार शून्य होने के कारण यह मल्टी-फेज या हाई-फ़्रीक्वेंसी की तुलना में समान सेटिंग्स पर कम तापीय ऊर्जा प्रदान करता है:

हीट यूनिट सूत्र:
HU = kVp × mA × Time (s) × Generator Factor
ऊर्जा (Joules) = HU × 0.707 = kVp × mA × Time (s) × 0.707

जनरेटर का प्रकारजनरेटर गुणांक (W)गणितीय सूत्रसापेक्ष तापीय ऊर्जा
सिंगल-फेज (1φ)1.00HU = kVp × mA × s × 1.001.00× (आधारभूत)
थ्री-फेज, 6-पल्स1.35HU = kVp × mA × s × 1.351.35× (+35% अधिक ऊष्मा)
थ्री-फेज, 12-पल्स1.41HU = kVp × mA × s × 1.411.41× (+41% अधिक ऊष्मा)
हाई-फ़्रीक्वेंसी (HF)1.45HU = kVp × mA × s × 1.451.45× (सर्वाधिक विकिरण उत्पादन)

5. जनरेटरों की तुलनात्मक तालिका (Engineering Specifications)

विशेषता (Feature)सिंगल-फेज (फुल-वेव)थ्री-फेज (6-पल्स)थ्री-फेज (12-पल्स)हाई-फ़्रीक्वेंसी (HF)
इनपुट पावर सप्लाई1φ (220V, 50/60 Hz)3φ (440V, 50/60 Hz)3φ (440V, 50/60 Hz)1φ या 3φ (5 से 100 kHz)
डायोड्स की संख्या4 डायोड6 डायोड12 डायोडइन्वर्टर + HF ब्रिज
पल्स / सेकंड (60 Hz)120360720स्थिर DC
वोल्टेज रिपल (Ripple)100%13.5%3.5% से 4%< 1%
औसत फोटॉन ऊर्जाkVp का ≈ 33% से 40%kVp का ≈ 91%kVp का ≈ 97%kVp का ≈ 99%
न्यूनतम एक्सपोज़र समय8.3 ms (1/120 s)1 ms1 ms< 1 ms
सापेक्ष ट्यूब आउटपुट1.0× (आधारभूत)2.7×2.9×3.0×

6. नैदानिक प्रभाव एवं आधुनिक प्रतिस्थापन (Clinical Significance)

  • मरीज की स्किन डोज में वृद्धि (High Patient Skin Dose): जब वोल्टेज चक्र निचले स्तर (0 से 40 kVp) से गुजरता है, तो अत्यधिक मात्रा में कम ऊर्जा वाले “सॉफ्ट एक्स-रे फोटॉन” निकलते हैं। ये फोटॉन शरीर को पार करके डिटेक्टर तक नहीं पहुँच पाते और केवल मरीज की त्वचा द्वारा अवशोषित हो जाते हैं, जिससे व्यर्थ रेडिएशन डोज़ बढ़ती है।
  • एक्सपोज़र समय की सीमा: वोल्टेज के बार-बार शून्य होने के कारण आवश्यक फिल्म घनत्व प्राप्त करने के लिए अधिक एक्सपोज़र समय (mAs) की आवश्यकता होती है, जिससे छाती और बच्चों के एक्स-रे में मोशन ब्लर (Motion Blur) होने की संभावना बढ़ जाती है।
  • आधुनिक प्रतिस्थापन: आधुनिक अस्पतालों और डायग्नोस्टिक सेंटरों में सिंगल-फेज जनरेटरों को पूरी तरह से हाई-फ़्रीक्वेंसी इन्वर्टर जनरेटरों से बदल दिया गया है, जो स्थिर विभव (< 1% रिपल), कम मरीज डोज़, कॉम्पैक्ट आकार और मिलीसेकंड से भी तेज एक्सपोज़र प्रदान करते हैं।

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