X-Ray फिलामेंट सर्किट (Filament Circuit): यह X-ray जनरेटर का एक महत्वपूर्ण उप-परिपथ (sub-circuit) है जिसका मुख्य कार्य कैथोड में स्थित टंगस्टन फिलामेंट को गर्म करने के लिए कम वोल्टेज (Low Voltage) और उच्च धारा (High Current) प्रदान करना है। इस तापन प्रक्रिया से थर्मियोनिक उत्सर्जन (Thermionic Emission) द्वारा इलेक्ट्रॉन मुक्त होते हैं, जो सीधे ट्यूब करंट (mA) और कुल विकिरण मात्रा (mAs) को नियंत्रित करते हैं।
1. कार्य सिद्धांत एवं थर्मियोनिक उत्सर्जन (Working Principle & Physics)
X-ray ट्यूब एक थर्मियोनिक वैक्यूम डायोड की तरह कार्य करती है। फिलामेंट सर्किट कैथोड पर उत्पन्न होने वाले इलेक्ट्रॉनों की संख्या निर्धारित करता है:
- थर्मियोनिक उत्सर्जन (Thermionic Emission): जब विद्युत धारा टंगस्टन के तार से होकर बहती है, तो इसके उच्च प्रतिरोध के कारण अत्यधिक ऊष्मा उत्पन्न होती है। जब तापमान ~2,200°C से ऊपर पहुँचता है, तो टंगस्टन के बाहरी इलेक्ट्रॉन धातु के बंधन (Work Function ~4.5 eV) को तोड़कर निर्वात में बाहर निकल आते हैं और एक इलेक्ट्रॉन बादल (Space Charge) बना लेते हैं।
- फिलामेंट करंट (If) बनाम ट्यूब करंट (mA):
- फिलामेंट हीटिंग करंट (If): यह वह धारा है जो फिलामेंट के तार को गर्म करने के लिए उसमें बहती है (6 से 12 V पर 3 से 6 A)।
- ट्यूब करंट (mA): यह वह इलेक्ट्रॉनों का प्रवाह है जो कैथोड से निकलकर एनोड टारगेट की ओर जाता है (40 से 150 kVp पर 50 से 1,200 mA)।
- गैर-रैखिक प्रभाव (Non-Linear Relationship): फिलामेंट हीटिंग करंट में थोड़ा सा बदलाव करने पर भी ट्यूब करंट (mA) में घातीय (exponential) रूप से बहुत बड़ा बदलाव होता है।
2. फिलामेंट सर्किट के मुख्य घटक (Key Components)
क. लाइन वोल्टेज कम्पेन्सेटर (Line Voltage Compensator)
यह आने वाली बिजली (Mains Supply) के वोल्टेज में होने वाले उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करता है। फिलामेंट का तापमान अत्यधिक संवेदनशील होता है, इसलिए इनपुट वोल्टेज में मात्र 1% का बदलाव रेडिएशन आउटपुट को 10% तक बदल सकता है। यह उपकरण आउटपुट को स्थिर रखता है।
ख. स्पेस-चार्ज कम्पेन्सेटर (Space-Charge Compensator)
जब ऑपरेटर कंसोल से kVp बढ़ाता है, तो अधिक आकर्षण बल के कारण कैथोड से इलेक्ट्रॉन तेजी से एनोड की ओर खिंचते हैं, जिससे बिना फिलामेंट तापमान बदले भी mA बढ़ सकता है। स्पेस-चार्ज कम्पेन्सेटर kVp बढ़ने पर फिलामेंट करंट को थोड़ा सा कम कर देता है ताकि चुना गया mA पूरी तरह स्थिर रहे।
ग. mA सिलेक्टर (mA Selector / Rheostat)
यह स्टेप-डाउन ट्रांसफार्मर के प्राइमरी सर्किट में जुड़े प्रतिरोधकों (Resistors) का एक बैंक होता है। इसके द्वारा अलग-अलग ट्यूब करंट स्टेशन्स (जैसे 50, 100, 200, 400, 800 mA) चुने जाते हैं। आधुनिक मशीनों में इसके लिए पल्स-विड्थ मॉड्यूलेशन (PWM) तकनीक का उपयोग होता है।
घ. फोकल स्पॉट सिलेक्टर एवं ड्यूल फिलामेंट (Dual Focus Filaments)
आधुनिक X-ray ट्यूब के निकल फोकसिंग कप में दो अलग-अलग आकार के टंगस्टन फिलामेंट लगे होते हैं:
- छोटा फिलामेंट (Small Focal Spot: 0.5 से 0.6 mm): यह कम mA (≤ 300 mA) पर काम करता है और बारीक हड्डियों व बच्चों की रेडियोग्राफी (High Spatial Resolution) के लिए उपयोग किया जाता है।
- बड़ा फिलामेंट (Large Focal Spot: 1.0 से 1.2 mm): यह उच्च mA (≥ 400 mA) पर काम करता है और भारी अंगों (छाती, पेट, रीढ़ की हड्डी) की रेडियोग्राफी में अत्यधिक ऊष्मा को झेलने के लिए उपयोग किया जाता है।
ङ. फिलामेंट स्टेप-डाउन एवं आइसोलेशन ट्रांसफार्मर
- Turns Ratio: यह एक स्टेप-डाउन ट्रांसफार्मर होता है जिसका अनुपात Np : Ns ≈ 10:1 से 20:1 होता है।
- विद्युत रूपांतरण: यह 220 V सप्लाई को घटाकर सुरक्षित 6 से 12 V करता है और धारा को बढ़ाकर 3 से 6 A कर देता है।
- हाई-वोल्टेज आइसोलेशन (सुरक्षा): इसका सेकेंडरी सिरा अत्यधिक उच्च ऋणात्मक विभव (-50 से -75 kV) पर जुड़ा होता है। ट्रांसफार्मर के ऑयल इंसुलेशन की वजह से यह हाई-वोल्टेज ऑपरेटर कंसोल तक नहीं पहुँच पाता, जिससे ऑपरेटर सुरक्षित रहता है।
3. टू-स्टेज एक्सपोज़र सीक्वेंस (Two-Stage Exposure Sequence)
एक्स-रे मशीन के एक्सपोज़र स्विच में दो चरण (Stages) होते हैं जो फिलामेंट और ट्यूब की उम्र बढ़ाते हैं:
- स्टैंडबाय अवस्था (Pre-Heat): मशीन चालू रहने पर फिलामेंट में हल्की धारा (~2 A) लगातार बहती रहती है जिससे तार गर्म रहता है लेकिन इलेक्ट्रॉन नहीं निकलते। इससे अचानक गर्म होने से होने वाला थर्मल शॉक रुकता है।
- रोटर / प्रेप अवस्था (First Stage): जब ऑपरेटर पहला बटन दबाता है, तो फिलामेंट करंट बढ़कर एक्सपोज़र लेवल (3 से 6 A) पर पहुँच जाता है और एनोड रोटर पूरी गति (3,400 से 10,000 RPM) से घूमने लगता है।
- एक्सपोज़र अवस्था (Second Stage): बटन पूरा दबाने पर हाई-वोल्टेज सर्किट ट्यूब पर kVp लागू करता है और इलेक्ट्रॉन एनोड की ओर त्वरित होकर एक्स-रे किरणें उत्पन्न करते हैं।
4. स्पेस-चार्ज प्रभाव बनाम संतृप्ति क्षेत्र (Space Charge vs. Saturation Region)
रिचर्डसन का थर्मियोनिक उत्सर्जन नियम (Richardson’s Law):
J = A · T2 · e(−W / kT)
यहाँ J = उत्सर्जन धारा घनत्व, T = तापमान, W = कार्य फलन (Work Function), तथा k = बोल्ट्जमैन नियतांक है।
चित्र 3: उत्सर्जन वक्र (Emission Curves): स्पेस चार्ज सीमित क्षेत्र बनाम संतृप्ति क्षेत्र
- स्पेस-चार्ज सीमित क्षेत्र (< 40 kVp): कम वोल्टेज पर कैथोड के पास इलेक्ट्रॉनों का घना बादल नए इलेक्ट्रॉनों को बाहर निकलने से रोकता है। इस क्षेत्र में ट्यूब करंट (mA) काफी हद तक kVp पर निर्भर करता है।
- संतृप्ति क्षेत्र (Saturation Region: > 40 kVp): 40 kVp से ऊपर एनोड का खिंचाव इतना तेज होता है कि निकलते ही सारे इलेक्ट्रॉन तुरंत एनोड पर पहुँच जाते हैं। यहाँ mA पूरी तरह kVp से स्वतंत्र हो जाता है और केवल फिलामेंट के तापमान पर निर्भर करता है।
5. परिपथ शाखाओं की तुलनात्मक तालिका (Comparison Table)
| मानक (Parameters) | फिलामेंट सर्किट (प्राइमरी) | कैथोड फिलामेंट (सेकेंडरी) | हाई-वोल्टेज सर्किट (सेकेंडरी) |
|---|---|---|---|
| वोल्टेज (Voltage) | 220 V AC (Mains) | 6 से 12 V AC | 40 से 150 kVp |
| विद्युत धारा (Current) | 0.2 से 0.5 A | 3 से 6 A (हीटिंग करंट) | 50 से 1,200 mA (ट्यूब करंट) |
| ट्रांसफार्मर का प्रकार | स्टेप-डाउन की प्राइमरी वाइंडिंग | स्टेप-डाउन की सेकेंडरी वाइंडिंग | स्टेप-अप ट्रांसफार्मर आउटपुट |
| कंसोल कंट्रोल | mA सिलेक्टर, लाइन कम्पेन्सेटर | फोकल स्पॉट स्विच | kVp सिलेक्टर, टाइमर |
| ग्राउंड विभव (Ground Potential) | चेसिस ग्राउंड (सुरक्षित) | उच्च ऋणात्मक विभव (-kV) | सेंटर-टैप्ड ग्राउंड |
6. ट्यूब सुरक्षा एवं मुख्य विफलताएं (Tube Protection & Failure Modes)
- फिलामेंट का वाष्पीकरण व टूटना (Filament Evaporation): लगातार अत्यधिक गर्म होने से टंगस्टन धीरे-धीरे वाष्पीकृत होकर पतला हो जाता है, जिससे इसका प्रतिरोध बढ़ता है और अंततः फिलामेंट बीच से टूट जाता है (Open Circuit)।
- ग्लास पर टंगस्टन का जमना (Tube Arcing): वाष्पीकृत टंगस्टन ट्यूब की कांच की दीवार पर जम जाता है। यह धातु की परत हाई-वोल्टेज को अपनी ओर आकर्षित करती है, जिससे ट्यूब में स्पार्किंग (Arcing) होती है और कांच टूट सकता है।
- अनावश्यक रोटर प्रेप दबाना (Rotor Prep Misuse): एक्सपोज़र स्विच के रोटर बटन को बेवजह ज्यादा देर तक दबाए रखने से फिलामेंट लगातार ~6 A पर जलता रहता है, जिससे ट्यूब की कार्यक्षमता और जीवनकाल बहुत तेजी से घट जाता है।
